इस बच्चे का पुनर्जन्म, विज्ञान को चुनौती

इस बच्चे का पुनर्जन्म, विज्ञान को चुनौती 

दोस्तों, पुनर्जन्म की कई किस्से कहानियां या फिल्में हमने देखी होगी, पर असल जिंदगी में यह मुमकिन है यह तो विज्ञान भी मानने को तैयार नहीं है| हम आज आपको बता रहे है दिल्ली के आगरा में रहने वाले सुरेश वर्मा के बारे में जिनका १९ अक्टूबर १९८६ के दिन अपनी रेडिओ की दूकान जिसका नाम सुरेश रेडिओस था, को बंद करके अपने घर जा रहा था और दो लोगों ने मिलकर उसकी हत्या कर दी| 
इस घटना के ५ साल बाद आगरा के पास एक गाँव में महावीर प्रसाद नामक व्यक्ति के घर एक बेटे ने जन्म लिया जिसका नाम तोरनसिंह उर्फ़ टीटू था| महज तीन साल की उम्र में ही किसी बड़े व्यक्ति की तरह बोलने और समझ रखने वाले इस बच्चे को देख उसके घरवाले उसे सारे बच्चो में सिर्फ होशियार समझते थे| टीटू बार बार किसी सुरेश रेडिओस नाम की दूकान का जिक्र करता था| 
५ साल का होने तक टीटू की जहन में बसने किरदार उसे परेशान करने लगे| घरवालों ने झाड़ - फूँक करके भी देख लिया पर कोई असर न हुआ| ५ साल का यह बच्चा, अपने खुद के बच्चे रोनू और सोनू के पास जाने की जिद करता था| परिवार ने हारकर आगरा जाकर छानबीन करने का फैसला किया और आखिरकार सदरबाजार में यह दूकान मिल ही गयी जिसमे उमा नामक एक महिला बैठी थी| पूछने पर उसने बताया की यह सुरेश वर्मा की दूकान है, जिसकी मौत हो चुकी है और वह उसकी पत्नी है| टीटू के परिवारवालों से बात करने के बात असलियत का पता लगाने उमा अपने सांस ससुर के साथ टीटू के गाँव पहोच गयी| टीटू अपने माँ बाप और उमा को देखकर बहोत खुश हुआ और उसने वो बातें बताई जो सिर्फ सुरेश वर्मा ही जानता था| 
टीटू को आगरा, अपनी दूकान ले जाया गया, उसने खुद दूकान का रास्ता दिखाया और दूकान में जाते ही इतने सालों में हुए फेरबदल को भी बताने लगा| इतना ही नहीं सुरेश वर्मा के दोनों बच्चों को कई सारे बच्चों के साथ भीड़ में भी टीटू ने पहचान लिया| सबसे चौकाने वाली बात यह थी कि सुरेश वर्मा को सिर के जिस तरफ गोली लगने से मौत हुई थी, टीटू को भी सिर के उसी जगह पर निशान था जिसे डॉक्टरों ने गोली लगने का ही निशान होने का अंदाजा लगाया| टीटू ने अपने कातिलों के नाम भी बताये, पर पुनर्जन्म के आधार पर कोई कानूनी करवाई नहीं होती ऐसा कानों और विज्ञान का कहना था| अब टीटू बड़ा हो गया है, और अपनी उन यादों के साथ न चाहते हुए भी जी रहा है|

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