७ साल की उम्र में यह बच्चा बना सर्जन

७ साल की उम्र में यह बच्चा बना सर्जन 
दोस्तों, कहावत है कि प्रतिभा उम्र की मोहताज़ नहीं होती| इसका जीता जागता सबूत है, 'अकृत प्राण जसवाल'| महज सात साल की उम्र में दुनिया का कोई भी बच्चा ठीक से कैची छुरी पकड़ना सीखता है| पर अकृत उसी कैची छुरी से किसी का ऑपरेशन कर सकता है, ऐसा किसी ने नहीं सोचा होगा| जी हाँ दोस्तों, ये है भारत का सबसे कम उम्र का सर्जन, जिसने पूरी दुनिया से वाहवाही बटोर चूका है| 
२३ अप्रैल १९९३ को हिमाचल के नूरपुर में जन्मे इस असाधारण बच्चे का जन्म हुआ| सिर्फ ५ साल की उम्र में शेक्सपीयर की किताबें पढ़ने वाले इस बच्चे के माँ और पिता ने उसी समय समझ लिया था कि उनका बच्चा बाकी बच्चों से अलग है| मेडिकल क्षेत्र में हड़कंप सा मच गया जब अपनी उम्र से सिर्फ १ साल बड़ी एक लड़की की कटी हुई उंगली का सफल ऑपरेशन अकृत ने किया था| चूँकि उस लड़की के घर वाले अपनी बेटी का इलाज किसी डॉक्टर से करने की हैसियत नहीं रखते थे| 
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यह तो कुछ भी नहीं| अकृत १२ साल की उम्र में भारत के मेडिकल स्कूल में प्रवेश पाने वाले सबसे कम उम्र के छात्र बने| उनका आईक्यू १४६ था, जो की उनके उम्र के किसी भी बच्चे से कई ज्यादा था| दुनिया के सात सबसे होनहार बच्चों की सूची में शामिल अकृत ने केमेस्ट्री में मास्टर्स डिग्री भी हासिल की है| इनकी छोटी सी उम्र में इस बड़ी उपलब्धि के कारण अकृत को लन्दन के इम्पीरियल कॉलेज में कैंसर जैसी बीमारी पर रिसर्च करने के लिए भी बुलाया गया था| 
आज अकृत की उम्र २४ साल है, फ़िलहाल कानपूर में आईआईटी से बायोइंजिनीरिंग की पढाई कर रहे है और भारत का नाम ऊँचा करने की और अपना कदम बढ़ा रहे है| 
ऐसे बच्चे जो देश के लाखों करोड़ों बच्चों के लिए एक प्रेरणा है और अपने जीवन और इस दुनिया में कुछ कर गुजरने का हौसला रखते है|  

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