भारत में स्थित ये है लंका मीनार, जहाँ भाई-बहन नहीं जा सकते एकसाथ

भारत में स्थित ये है लंका मीनार, जहाँ भाई-बहन नहीं जा सकते एकसाथ
दोस्तों, हमारे देश में ऐसे कई धार्मिक स्थल है जहाँ जोड़ियों में दर्शन के लिए जाना होता है| जैसे महाराष्ट्र के शनि-शिंगणापुर में मामा और भांजे की जोड़ी जाए तो शुभ रहता है, ऐसी मान्यता है| भारत में ऐसी भी एक जगह है जहाँ हर कोई जा सकता है, मगर सगे भाई-बहन एक साथ नहीं जा सकते है| तो चलिए आज हम आपको बताते है ऐसी ही एक जगह के बारे में| 
लंका मीनार
यूपी के जालौन में स्थित २१० फ़ीट ऊंची लंका मीनार है| जिसमे रावण के पूरे परिवार का चित्रण किया गया है| 
इस मीनार का निर्माण मथुरा प्रसाद ने कराया था जो एक समय में रामलीला में रावण के किरदार को दर्शकों के सामने पेश किया करते थे| मथुरा प्रसाद के अंदर रावण का किरदार इस कदर बस गया था कि उन्होंने रावण की याद में लंका का निर्माण ही कर डाला|
साल १८७५ में मथुरा प्रसाद निगम ने रावण की स्मृति में यहाँ २१० फ़ीट ऊंची मीनार का निर्माण कराया था, जिसे उन्होंने लंका का नाम दिया| इस मीनार को बनाने में सींप, उड़द की दाल, शंख और कौड़ियों का इस्तेमाल किया गया है और इसे बनाने में करीब २० साल का समय लगा था| 
उस समय इस मीनार के निर्माण में करीब १ लाख ७५ हजार रूपये की लागत आयी थी| स्वर्गीय मथुरा प्रसाद न केवल रामलीला का आयोजन करते थे, बल्कि स्वयं इस किरदार को भी दर्शकों के सामने जिवंत करते थे| इनके साथ रावण की पत्नी मंदोदरी का किरदार घसीटाबाई नामक एक मुस्लिम महिला निभाती थी| 
इस जगह पर ६५ फ़ीट की मेघनाथ की प्रतिमा के साथ १०० फ़ीट के कुम्भकरण की भी प्रतिमा है| वहीँ मीनार के सामने भगवान चित्रगुप्त और भगवान शंकर की मूर्ति है|
मंदिर का निर्माण इस तरह कराया गया है कि रावण अपनी लंका से भगवान शिव के २४ घंटे दर्शन कर सकता है| परिसर में १८० फ़ीट लम्बे नाग देवता और ९५ फ़ीट लम्बी नागिन गेट पर विराजमान है, जो मीनार की रखवाली करते है| 
नाग पंचमी के अवसर पर यहाँ भव्य मेले का आयोजन किया जाता है और दंगल भी लगता है| आपको बतादें कि कुतुबमीनार के बाद यही मीनार भारत की सबसे ऊंची मीनारों में शामिल है| 
खास बात यह है यहाँ एक मान्यता है कि भाई-बहन इस जगह पर एक साथ नहीं जा सकते है| इसका कारण ये है कि लंका मीनार के नीचे से ऊपर तक चढ़ते समय सात परिक्रमाएं करनी होती है, जो भाई-बहन नहीं कर सकते| ये सात फेरें केवल पति-पत्नी द्वारा मान्य माने गए है| इसी वजह से भाई-बहन का एक साथ यहाँ जाना वर्जित है| 
दोस्तों, अगर आपको हमारी यह पोस्ट अच्छी लगी हो तो कृपया इसे शेयर और लाइक जरूर कीजियेगा और कमेंट बॉक्स में लिखकर इसके बारे में लोगों को भी बताइयेगा|

टिप्पणियाँ