आत्महत्या के लिए मशहूर है ये ६ जगहें

आत्महत्या के लिए मशहूर है ये ६ जगहें
दोस्तों, जब किसी इंसान की जिंदगी में उतार-चढ़ाव आते है और परिस्थितियां इतनी खराब हो जाती है कि इंसान उनसे उभर नहीं पाते है और जिंदगी की जंग हारकर आत्महत्या कर लेते है| वैसे तो आत्महत्या करने के लिए किसी खास जगह की जरुरत नहीं होती है, मगर आज हम आपको ऐसी कुछ जगहों के बारे में बताने जा रहे है जो आत्महत्या करने के लिए मशहूर हुई है| 

कोलोरोडो स्ट्रीट पूल

कैलिफोर्निया में बने लगभग २०० फ़ीट लंबे इस पूल से आये दिन कई लोग आत्महत्या करते है| साल १९७२ से लेकर साल २००० के बीच यहाँ करीब २०० से भी ज्यादा लोगों ने आत्महत्या की है| सिर्फ साल १९८४ ही एक ऐसा साल रहा था जब किसी ने यहाँ आत्महत्या नहीं की थी| ऐसा कहा जाता है कि इस पूल से हर साल कम से कम १० लोग आत्महत्या करते है| 

बिची हेड ब्रिटेन 

ईस्ट ससेक्स काउंटी में ईस्टबोर्न टाउन में स्थित इस सुसाइड पॉइंट से साल में कम से कम २० लोग कूदकर अपनी जान गँवा देते है| यहाँ सुसाइड करने का दौर भी काफी पुराना है और कहा जाता है कि इस जगह पर सन १६०० से आत्महत्या करने का दौर चला आ रहा है| 

माउंट मिहारा 

जापान के ओशिमा नामक जगह पर स्थित इस सुसाइड पॉइंट का नाम काफी मशहूर है| जिसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि साल १९३३ में कुल ९४४ लोगों ने यहाँ अपनी जान दे दी थी| माउंट मिहारा के इस खतरनाक ज्वालामुखी में कूदकर लोग अपने आपको ख़त्म कर देते है| 

गोल्डन गेट ब्रिज 

सेंट फ्रांसिस्को के गोल्डन गेट ब्रिज को दुनिया में सबसे लोकप्रिय आत्महत्या के स्थान के रूप में जाना जाता है| साल १९३७ से अब तक १५०० से भी ज्यादा आत्महत्या इस जगह पर हुई है| साल १९९५ में तो सबसे ज्यादा यानी ४५ आत्महत्या इस जगह पर की गयी थी| अच्छी बात यह है कि इस पूल से करीब ७० लोगों को कूदने से बचाया भी गया है| 

नियाग्रा फाल्स 

आत्महत्या की जगहों की सूची में इस जगह का नाम न हो ऐसा हो ही नहीं सकता| यह जगह एक पर्यटक स्थल होने के साथ-साथ  सुसाइड के लिए भी मशहूर है| अमेरिका में स्थित इस जगह पर साल १८५६ से १९९५ के बीच करीब २७८० लोगों ने अपनी जान दे दी थी| 

ओकिगहरा फॉरेस्ट 

जापान के माउंट फिजी के इस जंगल में अब जगह-जगह पर आत्महत्या न करने के लिए सन्देश लगा रखे है| साल २००३ में यहाँ आत्महत्या करने वालों की संख्या साल में करीब १०० से भी अधिक हो गयी थी| साल २०१० तक यह आंकड़ा २४७ तक पहुंच गया था| यहाँ आत्महत्या करने वालों के मृत शरीर कभी-कभी तो मिलते भी नहीं है| 
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