गाय के गोबर से बनाई ऐसी चीजें, आप भी करेंगे इस महिला को सलाम

दोस्तों, गाय का हमारे देश में बहुत महत्त्व है| गाय को भारत में माता का दर्जा दिया जाता है| गाय के दूध को सर्वोत्तम आहार माना गया है| गौ मूत्र का भी पूजा इत्यादि में बेहद महत्त्व है| आयुर्वेद में गौमूत्र से कई प्रकार की दवाइयों का निर्माण किया जाता है|
ऐसे में बात की जाए गाय के गोबर की तो आज भी लोग गोबर के उपलों का उपयोग खाना बनाने में करते है| इन सारी बातों के बारे में हमने सुना भी है और देखा भी है, लेकिन आज हम आपको जो बताने जा रहे उस बारे में देखना तो दूर आपने कभी सूना भी नहीं होगा|
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दोस्तों, क्या आपने कभी ये सुना है कि गाय के गोबर से कपडे भी बनाये जा सकते है| शायद सुनने में थोड़ा अजीब लगे, मगर यह सच है| आपको बता दें, गाय के गोबर का उपयोग अब कपडे बनाने में किया जा रहा है| जी हाँ, नीदरलैंड के एक स्टार्टअप कंपनी ने गाय के गोबर से ड्रेस बनाई है|
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इस स्टार्टअप कंपनी का नाम वन डच है, जिसे कुछ साल पहले ही शुरू किया गया था| इस कंपनी को ज़लीला एसाईदी नाम की एक महिला चलाती है, जो नीदरलैंड की ही रहने वाली है और पेशे से एक बायोआर्ट एक्सपर्ट है|
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ज़लीला ही वह शख्स है जिन्होंने गाय के गोबर से ड्रेस बनाने के नायाब तरीके को ढूंढ निकाला है| गोबर में से सेल्यूलोज को अलग करके जलील ने ऐसा किया है| सिर्फ ड्रेस ही नहीं बल्कि ज़लीला ने गाय के गोबर को रीसायकल करके उससे पेपर, बायो - डिग्रेडेबल प्लास्टिक भी बनाई है| उन्होंने सबसे पहले इससे टॉप और शर्ट बनाये और इसके बाद उन्होंने गोबर का इस्तेमाल बाकी चीजों को बनाने में भी किया है|
इस अनोखे काम के लिए ज़लीला को चिवाज वेंचर एंड एच एंड एम फाउंडेशन ग्लोबल अवार्ड से सम्मानित किया गया और इसके साथ ही उन्हें दो लाख डॉलर का इनाम भी दिया गया|
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ज़लीला इसके बारे में कहती है कि लोग पहले गाय के गोबर को वेस्ट समझते थे और इसे बदबूदार भी मानते थे, लेकिन गोबर बहुत ही काम की चीज है| आने वाले समय में गोबर से बने कपड़ों का उपयोग फैशन शो में भी किया जाएगा| गोबर से निकले सेल्यूलोज को ज़लीला ने मेस्टिक नाम दिया है|

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ज़लीला ने मुताबिक़ सेल्यूलोज बनाने की प्रक्रिया केमिकल और मेकेनिकल है| हमें जो गोबर और गोमूत्र मिलता है उसमे करीब ८० प्रतिशत पानी होता है| गीले और सूखे हिस्से को अलग किया जाता है| गीले हिस्से में सॉल्वेंट से सेल्यूलोज बनाने के लिए फर्मेंटेशन होता है|  इसमें ज्यादातर हिस्सा घास और मक्के का होता है जो गाय अक्सर खाती है| सामान्य कपडा उद्योग से यह प्रक्रिया कहीं बेहतर है, क्यूंकि गाय के पेट में ही फाइबर के नरम बनने की शुरुवात हो जाती है| यह ऊर्जा की बचत करने वाला तरीका भी है| 
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दोस्तों, हम सब की तरफ से इस महिला को एक सलाम तो बनता ही है| अगर आपको हमारी यह जानकारी अच्छी लगी हो तो कृपया इसे शेयर और लाइक जरूर कीजियेगा और कमेंट बॉक्स में इसके बारे में लिखकर अपनी प्रतिक्रिया जरूर दीजियेगा|

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