गुमनामी में कट रही है इस अभिनेता की जिंदगी, पत्नी ने भी निकाल दिया था घर से

दोस्तों, हिंदी सिनेमा हो या हॉलीवुड की कोई फिल्म, किसी ना किसी फिल्म में एक हीरो का दोस्त या तो अपनी दोस्ती निभाते हुए दिखाई देता है या फिर दोस्ती के नाम पर आखिर में खलनायक निकलता है। आज हम आपको ऐसे ही एक अभिनेता के बारे में बताने जा रहे है जो परदे पर दोस्ती निभाते हुए हमेशा बेमिसाल रहे है।
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दीपक तिजोरी

२८ अगस्त १९६१ को मुंबई में जन्मे दीपक तिजोरी ने अपनी पढाई मुंबई में ही पूरी की। पढाई के बाद एक्टिंग में रूचि रखने वाले दीपक ने हीरो बनने की चाह रखते हुए एक थिएटर ग्रुप जॉइन किया था जिसमें आमिर खान, आशुतोष गोवारिकर, परेश रावल और विपुल दोशी भी मौजूद थे। एक्टिंग में दोस्तों द्वारा तारीफों की वजह से दीपक इस करियर में ज्यादा सीरियस हो गए। 
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एक इंटरव्यू में दीपक ने बताया कि एक्टिंग का डिसीज़न तो ले लिया लेकिन उन्हें काम नहीं मिल रहा था। निर्माताओं से मिलने के लिए उन्हें ३ साल ऑफिसों के चक्कर काटने पड़े, मगर कोई फायदा नहीं हुआ। इस बीच उन्होंने 'सिने ब्लिट्ज फिल्म मैगजीन' में एग्जीक्यूटिव के रूप में और बाद में मुंबई के होटल 'सी रॉक' में मैनेजर के तौर पर काम किया। 
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आखिरकार साल १९८८ में इन्हें पहला मौका मिला फिल्म 'तेरा नाम मेरा नाम' नामक फिल्म में जिसके निर्देशक रमेश तलवार थे। करण शाह, तन्वी आज़मी, सुपर्णा आनंद के साथ इन्हें काम करने का मौका मिला। इस फिल्म में पहली बार इन्होंने सहायक भूमिका निभाई वो भी ये सोचकर कि शुरुवात कर लेते है आगे लीड रोल कर लेंगे। मगर दुर्भाग्यवश ऐसा नहीं हो पाया।
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'तेरा नाम मेरा नाम' फिल्म के बाद उन्हें असली पहचान निर्माता-निर्देशक महेश भट्ट की फिल्म 'आशिकी' से मिली। फिल्म आशिकी के लिए महेश भट्ट ने दीपक तिजोरी को लीड रोल के लिए साइन किया था। इसी दौरान महेश भट्ट 'यूनिसेफ' के साथ काम कर रही इंदिरा रॉय के घर किसी काम के सिलसिले गए थे। वहां महेश की मुलाकात इंदिरा रॉय के बेटे राहुल रॉय से हुई। राहुल को देखते ही महेश ने अपनी फिल्म आशिकी में बतौर हीरों लेने की ठान ली और इसकी खबर दीपक को भी दे डाली। दीपक को निराशा तो हुई, मगर महेश ने उन्हें फिल्म से ना निकालते हुए फिल्म के हीरो के दोस्त की भूमिका दे दी। 
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फिल्म आशिकी जबरदस्त हिट साबित हुई और फिल्म में बल्लू नामक किरदार को करने के बाद दीपक को लोग पहचाने लगे। फिल्म इंडस्ट्री ने भी बतौर एक्टर दीपक पर भरोसा दिखाना शुरू किया और काम भी मिलने लगा, मगर हर दूसरी फिल्म में वो हीरों के दोस्त के किरदार में नज़र आने लगे थे। 

फिल्म आशिकी में दीपक के अच्छे काम को देखते हुए महेश भट्ट ने उन्हें अपनी अगली और दो फिल्मों में 'दिल है कि मानता नहीं' (१९९१) और 'सड़क' (१९९१) में भी काम दिया। इन फिल्मों में उनके निभाए किरदारों को खूब सराहा गया। इसके बाद साल १९९२ में इन्हें एक फिल्म मिली जिसका नाम था 'जो जीता वही सिकंदर'। इस फिल्म में दीपक को लिया जाने का एक रोचक किस्सा भी है।
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मंसूर खान की इस फिल्म के लिए आमिर खान के बाद दूसरे लीड रोल के लिए अक्षय कुमार ने ऑडिशन दिया था, लेकिन उन्हें ये फिल्म नहीं मिली। ये रोल मॉडल से एक्टर बने मिलिंद सोमण को मिला। तमिलनाडु के कोडैकनाल में फिल्म की शूटिंग शुरू की गयी। करीब ६० दिनों तक फिल्म शूट करने के बाद मिलिंद ने किन्हीं कारणों से ये फिल्म छोड़ दी। 
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इसके बाद इस किरदार के लिए दीपक तिजोरी को कास्ट किया गया और पूरी फिल्म दोबारा शूट करनी पड़ी। इस फिल्म में दीपक तिजोरी ने शेखर मल्होत्रा नाम के कॉलेज स्टूडेंट का किरदार किया था। इसी फिल्म के आखिर में आमिर खान उन्हें ही हराकर साइकिल रेस जीतते है। बता दें कि इसी साल रिलीज़ हुई फिल्म 'खिलाड़ी' में अक्षय कुमार ने लीड रोल किया जबकि दीपक तिजोरी के हिस्से में उस फिल्म में भी हीरो के दोस्त का किरदार ही आया।
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आलम ये था कि फिल्मों में हीरो की हिरोइन से पहले दीपक तिजोरी को हीरो के दोस्त के रूप में चुन लिया जाया करता था। आमिर खान, शाहरुख़ खान और अक्षय कुमार के दोस्त का किरदार निभाने के बाद दीपक ने खुद ही एक फिल्म का निर्माण किया और उस फिल्म में खुद बतौर लीड हीरो बनकर लोगों के सामने आये। इस फिल्म का नाम था 'पहला नशा', जिसे आशुतोष गोवारिकर ने निर्देशित किया और दीपक के साथ पूजा भट्ट और रवीना टंडन बतौर अभिनेत्री काम किया था। मगर ये फिल्म जबरदस्त फ्लॉप साबित हुई।
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फिर दीपक ने डायरेक्शन में कदम रखा और 'खामोश-खौफ की रात' (२००३), 'फरेब' (२००५), 'टॉम डिक एंड हैरी' (२००६) और 'फॉक्स' (२००९) जैसी फ़िल्में भी बनाई। इन फिल्मों की कहानियों ने साथ नहीं दिया और साड़ी फ़िल्में असफल रही। इसके बाद कुछ टीवी सीरियलों में भी इन्होंने काम किया जो लोगों को पसंद भी आ रहे थे कि इस बीच इनकी निजी ज़िन्दगी में दिक्कतें शुरू हो गयी।
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साल २०१७ में इनकी पत्नी शिवानी तोमर ने उन्हें उनके घर से निकाल दिया। उनकी पत्नी के मुताबिक दीपक के दूसरी महिलाओं के साथ गैर संबंध थे। दीपक इसके जवाब में अपनी पत्नी पर एक्शन लेने अपने काउंसलर के पास गए तो उन्हें ये पता चला कि शिवानी ने अपने पिछले पति को तलाक दिए बगैर दीपक से शादी की थी और शिवानी उनकी कानूनन पत्नी नहीं है। बता दें कि दो दशक से भी ज्यादा पुरानी इस शादी से दीपक और शिवानी को एक बेटी भी है जिसका नाम समारा है। 
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हर तरह की परिस्थितियों का सामना करते हुए दीपक आज भी अपना काम कर रहे है और आज भी कुछ फिल्मों में काम कर रहे है। इसके पहले आखिरी बार दीपक को फिल्म 'साहिब बीवी और गैंगस्टर-३' में देखा गया था। 
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