December 7, 2021

विनोद खन्ना – जब पिता ने सर पर बन्दूक तानकर फिल्मों में काम ना करने की दी थी धमकी

आज भले ही विनोद खन्ना हमारे बीच नहीं है मगर उनकी यादें सिनेमा प्रेमियों के बीच हमेशा बनी रहेंगी। फिल्मों में अभिनय करने के अलावा विनोद खन्ना ने राजनीति में भी हाथ आजमाया था। अपने आखिरी समय में विनोद खन्नाजी कैंसर जैसी बीमारी के चलते फ़िल्मी दुनिया की चमक-धमक से दूर हो गए थे। 

ajab-jankari-bollywood-ke-kisse-when-vinod-khanna-was-on-a-gun-point-of-a-father-for-not-doing-films-विनोद खन्ना

पकिस्तान के पेशावर में ६ अक्टूबर १९४६ के दिन जन्मे विनोद खन्ना के पिता किशनचंद खन्ना एक टेक्सटाइल व्यापारी थे। वो चाहते थे कि बेटा विनोद भी उनकी तरह उनका बिज़नेस संभाले। मगर बचपन में उनके एक स्कूल टीचर ने उन्हें एक नाटक में जबरदस्ती घुसा दिया था। 

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हालांकि विनोद खन्ना ने उस नाटक में ऐसी जबरदस्त अभिनय किया कि उनका अभिनय सभी को बेहद पसंद आया था। यही वजह भी बनी कि विनोद खन्नाजी के मन में अभिनय की लालसा जाग उठी। बड़े होने पर विनोद खन्नाजी फिल्मों में अपने मुकाम की तलाश करने लगे। 
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जब इस बात की खबर विनोद खन्नाजी के पिता तक पहुंची तो वो बेहद नाराज़ हो गए। इसी नाराज़गी के चलते एक दिन विनोद खन्नाजी के पिता ने उनको मारने के लिए उनपर बन्दूक तान दी और बोले कि ‘अगर तुम फिल्मों में गए तो तुम्हें गोली मार दूंगा।’ 

ajab-jankari-bollywood-ke-kisse-when-vinod-khanna-was-on-a-gun-point-of-a-father-for-not-doing-films-विनोद खन्नाइस नाराजगी में बीच-बचाव करने वाली विनोद खन्ना की मां कमला खन्ना ने किसी तरह विनोद के पिता को मना तो लिया, मगर विनोद खन्ना को महज दो साल की मोहलत दी और कहा कि इन दो सालों में अगर तुम्हें कामयाबी नहीं मिली तो तुम्हें मेरे साथ काम करना पड़ेगा। विनोद खन्नाजी मान भी गए।

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फिर क्या था, विनोद खन्ना जब फिल्मों में आये तो अपनी एक्टिंग और चार्मिंग पर्सनालिटी से सभी को अपना दीवाना बना दिया। इनकी अदायगी और डायलॉग बोलने का तरीका ऐसा था कि लोग ताली और सींटिया बजाये बगैर नहीं रह पाते थे। 

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ये ऐसे कुछ ही अभिनेताओं में एक थे जो खलनायिकी के रोल से शुरुवात करते हुए हीरो बने थे। साल १९६८ की फिल्म ‘मन का मीत’ से एक खलनायक की भूमिका निभाने वाले विनोद खन्नाने शुरुवाती दौर में फिल्म पूरब और पश्चिम, सच्चा झूठा, आन मिलो सजना, मस्ताना, एलान और मेरा गांव मेरा देश जैसी फिल्मों में खलनायक के रूप में काम किया। इसके बाद साल १९७१ में ‘हम तुम और वो’ और ‘मेरे अपने’ जैसी फिल्मों से उन्हें हीरो के रूप में पहचान मिली। ajab-jankari-bollywood-ke-kisse-when-vinod-khanna-was-on-a-gun-point-of-a-father-for-not-doing-films

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