April 17, 2021

Gudiyon Ka Aspataal – पिछले १०० साल में हो चूका है ३० लाख गुड़ियों का इलाज

Gudiyon Ka Aspataal – पिछले १०० साल में हो चूका है ३० लाख गुड़ियों का इलाज

अगर आप सोच रहे हो कि अस्पताल केवल इंसानों और जानवरों के लिए होते है| तो यह गलत है| ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में एक Gudiyon Ka Aspataal है जहाँ केवल गुड़ियों का इलाज होता है| यहाँ पर गुड़ियों को रिपेयर करके बनाया जाता है| अब यदि आप सोच रहे है कि इस अस्पताल में कौन आता होगा तो आपको बतादें कि पिछले १०१ साल में इस अस्पताल में करीब ३० लाख से भी ज्यादा गुड़ियों का इलाज हो चूका है|
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साल १९१३ में ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में इस अस्पताल की शुरुवात हेरोल्ड चैपमैन ने की थी| हारोल्ड ने सिडनी में एक जनरल स्टोर के रूप में इस अस्पताल की शुरुवात की थी| उनके भाई का शिपिंग का कारोबार था और इसी के तहत जापान से गुड़ियाँ इम्पोर्ट की जाती थी|

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लाने और ले जाने के दौरान गुड़ियों के पार्ट टूट-फूट जाते थे, जिसे हारोल्ड ठीक किया करते थे| धीरे-धीरे उन्होंने इस जनरल स्टोर को एक गुड़ियों के अस्पताल का रूप दे दिया और आज यह अस्पताल  हारोल्ड के पोते जियोफ कर रहे है|

omg-facts-dolls-hospital-Gudiyon Ka Aspataalयह अस्पताल अपने आप में इसीलिए खास माना जाता है क्यूंकि यहाँ गुड़ियों को ठीक करने के बेहतरीन लोग मौजूद है| यहाँ पर एक आम अस्पताल की तरह ही अलग-अलग वार्ड बने हुए है, जहाँ पर अलग-अलग स्पेशलिस्ट सेवा देते है| कोई गुड़िया का सिर रिपेयर करने में माहिर है तो कोई पैर रिपेयर करने में माहिर है| यहाँ पर मॉडर्न और एंटीक गुड़ियों के अलग-अलग सेक्शन बने हुए है|

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इस अस्पताल के शुरवाती समय में यहाँ पर केवल गुड़िया ही ठीक की जाती थी| लेकिन साल १९३० में हारोल्ड चैपमैन के बेटे ने यहाँ काम संभाला तो उन्होंने यहाँ पर अन्य चीजों की भी रिपेयरिंग शुरू कर दी जैसे कि टेडी बेयर, सॉफ्ट टॉयज, अम्ब्रेला, हैंड बैग इत्यादि| लेकिन यहाँ की स्पेशलिटी केवल गुड़ियों को रिपेयर करना ही है|

omg-facts-dolls-hospital-गुड़ियों का अस्पताल

साल १९३९ में द्वितीय विश्वयुद्ध के समय इस अस्पताल के बिज़नेस में तेजी आयी क्यूंकि युद्ध के चलते हर देश में उस चीज की कमी आ गयी जो दूसरे देशों से आती थी| जिसकी वजह से ऑस्ट्रेलिया में भी नयी गुड़िया बेहद कम हो गयी थी|  जिसके पास जो गुड़िया थी उसी से काम चलना पड़ता था और ख़राब होने पर उन्हें यहाँ रिपेयर कराने के अलावा कोई रास्ता नहीं होता था|

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अस्पताल के संचालक जियोफ के मुताबिक जब लोग अपनी प्यारी गुड़िया यहाँ जमा कराने आते है तो उनकी आँखों में आंसू होते है| लेकिन इसके बाद जब कोई बच्चा अपनी प्यारी गुड़िया लेने वापस आता है, तब उसके चेहरे पर जो मुस्कान होती है उससे बढ़कर हमारे लिए कोई चीज नहीं है|

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