October 22, 2021

438 दिनों तक समुद्र में जिंदा रहा यह आदमी

438 दिनों तक समुद्र में जिंदा रहा यह आदमी

वैसे तो ज्यादातर लोगों को अपने अंदर की शक्ति का पता नहीं चल पाता है| ऐसी शक्तियों का पता कभी-कभी  आनेवाली मुसीबतों के बाद ही चल पाता है| आज हम आपको ऐसे ही व्यक्ति के बारे में बताने जा रहे है जिसकी अंधरुनि शक्ति ने उसे 438 दिनों तक समुद्र में जिंदा रखा था|

how-1-man-survived-being-lost-438-days-at-seaसल्वाडोर अल्वरेंगा 

21 दिसंबर 2012 को 36 वर्षीय यह मछुआरा अपने एक मित्र के साथ समुद्र में मछली पकड़ने के लिए मैक्सिको के तट से जाने की तैयारी कर रहा था| ये दोनों अपने साथ करीब 70 गेलन फ्यूल, 16 गेलन पीने का पानी, 15 पाउंड खुद पर लगने वाला चारा, बाल्टियां, जीपीएस और मोबाइल फ़ोन जैसी सारी जरुरत का सामान अपने साथ लेकर गए थे|
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अपनी यात्रा की धीमी शुरुवात के साथ दोनों ने को समुद्री रास्तों पर आने वाली मुसीबतों के बारे में अच्छी जानकारी भी थी| समय बीतता गया और मौसम का मिजाज बिगड़ने लगा| ऐसे में सल्वाडोर ने तो अपने आप को संभाल लिया और नांव को सही दिशा की ओर मोड़ने की कोशिश भी करता रहा, मगर वहीँ उसके मित्र का बुरा हाल हो रखा था| हिलती-डुलती नांव के कारण उसे उल्टियां होने लगी थी|
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कुछ समय बाद तूफ़ान थमा और दोनों ने अपने आप को संभाल तो लिया मगर इस तूफ़ान के चलते दोनों किनारे से काफी दूर निकल गए थे| मुश्किलें तो तब बढ़ी जब दोनों को ये पता चला कि नांव के इंजन ने काम करना बंद कर दिया है| बदकिस्मती से इनका जीपीएस भी काम करना बंद कर चूका था|
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ऐसे में सल्वाडोर ने बचावदल से रेडियो से संपर्क साधने की कोशिश की, कड़ी मशक्कतों के बाद एक बचावदल ने उन्हें लंगर डालकर नांव को एक जगह रोके रखने की सलाह दी, ताकि वे लोग उन्हें ढूंढ सकें| मगर इनके पास लंगर भी नहीं था, जिसकी वजह से अभी-अभी शांत हुए तूफ़ान की लहरों ने इनकी नांव को किनारे से और भी दूरी कर दिया|
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लगातार नांव में पानी भरने की वजह से नांव का भार बढ़ रहा था, कहीं नांव पलट ना जाय इस वजह से इन्हें अपनी पकड़ी हुई करीब 500 किलो तक वजनी मछलियों को समुद्र में फेंकने का निर्णय लेना पड़ा| अब जिंदा रहने के लिए करीब 14 दिनों तक ये दोनों जेली फिश और कछुए पकड़ने लगे थे|how-1-man-survived-being-lost-438-days-at-sea
14 दिनों बाद हुई बारिश की वजह से इन्हें पीने का पानी नसीब हुआ| जैसे-तैसे दो महीने गुजर गए| ऐसे में सल्वाडोर के मित्र ने एक ख़राब कछुआ खा लिया और उसकी तबियत बिगड़ गयी और इसी के चलते उसने अपने प्राण त्याग दिए| सल्वाडोर अब पूरी तरह से अकेला था और कुछ दिनों तक तो उसे ऐसा लगता रहा के उसका मित्र अब भी जिंदा है| कुछ दिनों बाद सल्वाडोर को ये यकीन हो गया कि उसका मित्र अब इस दुनिया में नहीं रहा, तो सल्वाडोर ने उसके सारे कपडे उतारकर उसके शरीर को समुद्र में छोड़ दिया|how-1-man-survived-being-lost-438-days-at-sea
सल्वाडोर हर रोज कई बड़े-बड़े जहाजों को अपने सामने से जाते हुए देखता था, मगर वो सारे जहाज उसकी पहुंच से काफी दूर थे| ऐसे में सल्वाडोर को एक और तूफ़ान का सामना करना पड़ा| लेकिन यह तूफान ने सल्वाडोर को ऐसी जगह ले गया जहां शायद उसकी जान बच सकती थी| तूफ़ान थमने के बाद सल्वाडोर की आंखों के सामने एक आइलैंड था| समुद्र में करीब 438 दिन बिता चुके सल्वाडोर के हाथ-पांव और शरीर पूरी तरह कमजोर पड़ चुके थे| ऐसे में न्यूजीलैंड के पास मार्शल नामक आइलैंड के लोगों ने सल्वाडोर की जान बचायी|
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अपने परिवार से इतने दिनों के बाद मिलना सल्वाडोर के लिए किसी सपने के जैसा ही था और उसके परिवार को यकीन करना मुश्किल हो गया था कि सल्वाडोर जिंदा उनके सामने खड़ा है| सल्वाडोर जब अपने मित्र के परिवार वालों से मिला तो उसके मित्र के परिवार को सारी बात बताई मगर उन लोगों ने सल्वाडोर की बातों पर विश्वास ना करते हुए उसी पर अपने मित्र को मारकर उसका मांस खाने का गंभीर आरोप लगा दिया| मगर इन सबसे परे केवल सल्वाडोर ही यह जानता था कि आखिर सच क्या है? बाद में सल्वाडोर का केस लड़ रहे उसके वकील ने लोगों के सामने यह बात रखी कि उसके लाइ डिटेक्टर मशीन का परिक्षण भी सफलतापूर्वक पास कर लिया था|
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