July 23, 2021

काली मठिया मंदिर – 300 साल पुराने इस मंदिर में माता को चढ़ाएं जाते है ताले

काली मठिया मंदिर – 300 साल पुराने इस मंदिर में माता को चढ़ाएं जाते है ताले

वैसे तो मंदिरों में देवी-देवताओं को खुश करने के लिए लोग फल-फूल और माला या अगरबत्ती का चढ़ावा चढ़ाते है| मगर आज हम आपको कानपूर शहर में स्थित काली मठिया मंदिर के बारे में बताने जा रहे है जहाँ श्रद्धालु सोने-चांदी और दूसरी मूलयवान वस्तुओं से बने तालों का चढ़ावा चढ़ाते है|

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कानपूर शहर के मध्य बिरहाना रोड इलाके के बंगाली मोहल्ले में करीब 300 साल पुराना माँ काली का मंदिर है| जहाँ आनेवाले श्रद्धालु मंदिर के प्रांगण में ताला लगाकर अपनी मन्नत मांगते है और मन्नत पूरी होने पर वापस अपना ताला खोलकर ले जाते है|

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मंदिर के पुजारी रविंद्र नाथ बनर्जी के मुताबिक माता के दरबार में रोजाना हजारों भक्त दर्शन के लिए आते है और माता के दरबार में सच्ची भक्ति के साथ आने वाले हर भक्त की मनोकामना पूरी होती है| भक्तों द्वारा लाये गए ताले की पूरे विधि-विधान के साथ पूजा करने के बाद मंदिर के प्रांगण में एक पेड़ से बांधकर चाभी से बंद कर दिया जाता है|
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मनोकामना पूरी होने पर भक्त एक बार फिर यहाँ आकर ताले की विधिपूर्वक पूजा करते है और ताला खोलकर वापस ले जाते है| कई बार तो भक्तों को ताला खोलने में बड़ी दिक्कत होती है क्यूंकि तालों की तादात बढ़ जाने पर उन्हें अपना ताला नहीं मिल पाता है|

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इस मंदिर की स्थापना और देवी माँ की मूर्ती कब और किसने इस जगह स्थापित की है इसके बारे में अब तक किसी को कुछ पता नहीं चल पाया है| मान्यता है कि सदियों पहले एक महिला भक्त बेहद परेशान थी| वह हर दिन माँ काली के मंदिर में दर्शन करने के लिए आती थी|
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कुछ दिनों बाद वह महिला भक्त मंदिर के प्रांगण में ताला लगाने लगी तो पुरोहित ने इस बारे में उससे सवाल किया| जिसके जवाब में महिला ने कहा कि उसके सपनों में माँ काली आई थी और उसे ऐसा करने के लिए कहा था, जिससे उसकी इक्षा पूरी हो सके|
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कुछ समय बाद वह महिला कभी नहीं दिखाई दी और बाद में उसका ताला भी गायब हो गया| ताले की जगह दीवार पर लिखा हुआ पाया गया कि मेरी मनोकामना पूरी हो गयी है तो मैं ताला खोल रही हूं|
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तब से माँ काली को यहाँ ताला वाली देवी के नाम से भी जाना जाने लगा| बता दें कि चैत्र नवरात्री के समय इस मंदिर में भक्तों की भीड़ और बढ़ जाती है| जहाँ सिर्फ उत्तर प्रदेश से ही नहीं बल्कि देशभर से भक्त अपनी मनोकामना लेकर इस मंदिर में आते है|
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