ये है दशरत मांझी की तरह एक मिसाल, खोद डाले १४ तालाब

ये है दशरत मांझी की तरह एक मिसाल, खोद डाले १४ तालाब

इंसान अगर ठान लें तो क्या नहीं कर सकता है| इसकी सबसे बड़ी मिसाल हम दशरत मांझी के रूप में देख चुके है| जिन्होंने आधी से ज्यादा ज़िन्दगी पहाड़ खोदकर रास्ता बनाने के लिए निकाल दी| इनकी ही तरह ऐसा ही एक जबरदस्त कारनामा कर्नाटक के दसानदोड्डी गाँव के निवासी केरे कामेगौडा ने कर दिखाया है|

ये है दशरत मांझी की तरह एक मिसाल, खोद डाले १४ तालाब

आज कामेगौडा ८२ साल के है और ४० साल पहले जब ये पहाड़ियों पर जानवर चराने के लिए जाते तो उन जानवरों के लिए कहीं भी पानी नहीं मिल पाता था| जिसकी वजह से जानवर प्यासे रह जाते थे| क्यूंकि इस पहाड़ी इलाके में एक भी तालाब नहीं था| जब इन्होंने इसके बारे में गंभीरता से सोचा तो ये महसूस हुआ कि तालाब नहीं होने की वजह से बारिश का पानी यहाँ टिक नहीं पाता और सारा पानी पहाड़ी इलाके की वजह से नीचे की और बह जाता था| तभी इनके दिमाग में पानी जमा करने के लिए तालाब बनाने की तरकीब सूझी| ये है दशरत मांझी की तरह एक मिसाल, खोद डाले १४ तालाबइनके पास उस समय तालाब खोदने के लिए पर्याप्त सामान नहीं था, जिसके लिए इन्होंने अपनी भेड़-बकरिया भी बेच दी| तब से लेकर अब तक कामेगौडा ने कुल १४ तालाब खोद दिए है| जिसकी वजह से आज पूरे गाँव में पानी की कमी नहीं है और इन्हीं की वजह से यह पूरा पहाड़ी इलाका आज स्वर्ग की तरह सुन्दर बना हुआ है| 

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ये है दशरत मांझी की तरह एक मिसाल, खोद डाले १४ तालाबअपने जीवन के ४० साल पर्यावरण और पशुओं के लिए कुर्बान करने वाले कामेगौडा को अब तक कई पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चूका है| जिसमे कर्नाटक सरकार द्वारा दिया हुआ बसवश्री या बसवेश्वर पुरस्कार भी शामिल है| कई बार पुरस्कार के तौर पर इन्हें धनराशियां भी प्राप्त हुई है, लेकिन वो सारी धनराशि इन्होंने तालाब बनाने में लगा दी, जो करीब १२ से १५ लाख रुपयों तक होगी| ये है दशरत मांझी की तरह एक मिसाल, खोद डाले १४ तालाबइस काम की शुरुवात करते समय इन्होंने अपनी सारी सेविंग भी इसमें लगा दी थी| जिसकी वजह से घर-परिवार वालों ने भी इनसे मुँह मोड़ लिया था| कुछ लोगों ने इनका खूब मजाक भी उड़ाया था| मगर इस सबकी परवाह किये बगैर कामेगौडा ने अपना काम जारी रखा| इनका यह जूनून देखकर उनके गाँव वाले और रिश्तेदार मैडमैन कहकर बुलाते थे| ये है दशरत मांझी की तरह एक मिसाल, खोद डाले १४ तालाबआपको बता दें, साल २०१७ तक कामेगौडा ने सिर्फ ६ तालाब ही बनाये थे, लेकिन पिछले एक साल में लोगों के साथ के कारण इनके काम में तेजी आयी और यह आंकड़ा दोगुने से भी ज्यादा हो गया| कामेगौडा ने ज्यादा पढाई तो नहीं की है लेकिन इन्होंने अपने तालाबों के नाम पौराणिक कथाओं के नाम पर रखे है| पहले तालाब का नाम गोकर्ण और इन्ही तालाबों को जोड़नेवाली जो सड़कें इन्होंने बनायीं है उनका नाम राम और लक्ष्मण के नाम पर रखें है| 

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